मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी का मूवी रिव्यू पढ़े

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भारत में राजा-महाराजाओं पर अनेक फ़िल्में बनी है| यदि हम पहले बनी किसी फिल्म के साथ ‘मणिकर्णिका’ की तुलना करें, तो इस फिल्म को अब तक की सबसे बेहतर फिल्माई गई फिल्म कहा जा सकता है, क्योंकि पहले ही सीन से आप फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ करने लगेंगे| फिल्म ‘मणिकर्णिका’ कई विवादों के बाद यह फिल्म रिपब्लिक डे पर रिलीज हो रही है। आईये जानते है, इस फिल्म में क्या खास है ?

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फिल्म की स्टोरी

इस फिल्म की शुरुआत अमिताभ बच्चन की दमदार अवाज से होती है|  अमिताभ बच्चन की आवाज सुनकर आपको लगान की यादें ताजा हो जाएगी। पेशवा (सुरेश ओबेरॉय) की दत्तक बेटी मणिकर्णिका उर्फ मनु जन्म से ही साहसी और सुंदर हैं।  ऐसे में राजगुरु (कुलभूषण खरबंदा) की निगाह उन पर पड़ती है। मनु के साहस और शौर्य से प्रभावित होकर वह झांसी के राजा गंगाधर राव नावलकर (जीशू सेनगुप्ता ) से उसकी शादी करते हैं। ऐसे में मनु झांसी की रानी बनती है।

झांसी की रानी को अंग्रेजों के सामने कभी सिर झुकाना हीं चाहती, परन्तु वह झांसी को वारिस देने पर खुश है, कि अब उसके अधिकार को अंग्रेज बुरी नियत से हड़प नहीं पाएंगे, मगर घर का भेदी सदाशिव (मोहम्मद जीशान अयूब) षड्यंत्र रचकर पहले लक्ष्मीबाई की गोद उजाड़ता है, इससे पहले कि वो एक बालक को गोद लेते, राजा की भी मौत हो जाती है|  ऐसे में राज्य का ज़िम्मा लक्ष्मीबाई अपने कंधो पर ले लेती है, और शुरु होती है अंग्रेज़ी हुकूमत से जंग|

फिल्म में 1857 के राष्ट्रीय आंदोलन को गहराई से नहीं दर्शाया गया है। अंग्रेजों के हर वार को नाकाम करते हुए लक्ष्मीबाई जब ग्वालियर पहुंचती है, तो तब तक आजादी का बिगुल देशभर में बज चुका है| क्लाइमेक्स में अंग्रेज सर ह्यूरोज की सेना के साथ लक्ष्मीबाई का युद्ध और वीरतापूर्ण ढंग से प्राणों की आहुति देने वाला अंदाज रोंगटे खड़े कर देता है।

फिल्म का बेस्ट पार्ट

फिल्म का बेस्ट पार्ट इसका एक्शन है। कंगना रनौत और टीवी से बॉलीवुड में कदम रखने रही एक्ट्रेस अंकिता लखंडे दोनों को पर्दे पर तलवारबाजी करते हुए देखना रोमांचक है। फिल्म का बैग्राउंड म्यूजिक और साउंड 1857 की क्रांति जैसा ही जोश भर देता है।

एक्टिंग
यदि हम कंगना रनौत के अभिनय की बात करें, तो उनकी परफॉर्मेंस को देखकर लगता है, कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का रोल उन्हीं के लिए बना था। शायद इस फिल्म में उनकी परफॉर्मेंस क्वीन को भुला दे। हालांकि, झलकारी बाई के रोल में अंकिता लोखंडे को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं दिया गया है, लेकिन अपनी पहली फिल्म में वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रही हैं।

गुलाम गौस खान के रोल में डैनी की परफॉर्मेंस नें यह साबित कर दिया है, कि उनमें पहले जैसी धार अभी भी कायम है। वहीं, गंगाधर राव के रोल में जीशूसेन गुप्ता, पेशवा के रोल में सुरेश ओबरॉय और राजगुरु के रोल में कुलभूषण खरबंदा ने अपना रोल बेहतरीन अदाकारी के साथ निभाया है। 

फिल्म को मुख्य रूप से कंगना ने डायरेक्ट किया है| कई विवादों और आपसी टकराव के बाद भी कंगना ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। फिल्म के अंतिम 40 मिनट आपके रौंगटे खड़े कर देंगे।

26 जनवरी अर्थात रिपब्लिक डे की छुट्टी के पर यदि आप अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ फिल्म देखने का मन बना रहे हैं, तो मणिकर्णिका सबसे अच्छा ऑप्शन है।  

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