पढ़े “वाय चीट इंडिया” का मूवी रिव्यू – एजुकेशन सिस्टम पर सवाल उठाती है यह फिल्म

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भारतीय शिक्षा प्रणाली पर अनेक फ़िल्में बनी है, इसी क्रम नें ‘वाय चीट इंडिया’ भी शामिल हो गयी है | यह फिल्म आज 18 जनवरी को रिलीज हो रही है| इस फिल्म में  भारतीय एजुकेशन सिस्टम से सम्बंधित परेशानियों और परीक्षा के दौरान होने वाले वाली चीटिंग को दर्शाया गया है, जिसे चीटिंग माफियाओं द्वारा बड़ी सावधानी से अंजाम दिया जाता है।

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इमरान हाशमी इस फिल्म में राकेश सिंह का अभिनय कर रहे हैं, जो पैसे लेकर परीक्षाओं में अमीर स्टूडेंट्स को पास कराने के लिए उनके स्थान पर होशियार छात्रों को परीक्षा देने भेजते है।

फिल्म की स्टोरी

फिल्म की स्टोरी में राकेश सिंह उर्फ रॉकी(इमरान हाशमी) एक ऐसे शख्स है, जो अपने परिवार और अपनें सपनों को पूरा करने के लिए चीटिंग की दुनिया कदम रखते है । राकेश एक ऐसा माफिया है, जो शिक्षा व्यवस्था की कमियों का जमकर लाभ उठाता है। वह एजुकेशन की सिस्टम में अंदर तक अच्छी पैठ है |

वह निर्धन योग्य और अच्छे पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से अमीर बच्चों के स्थान पर एंट्रेंस एग्जाम्स दिलवाता है, और बदले में उन्हें पैसे देता है। वह ऐसा समझता है, कि अमीर बच्चों से पैसे लेकर गरीब बच्चों को उनकी जगह परीक्षा दिलाकर और उन्हें पैसे देकर वह कोई अपराध नहीं कर रहा है |

तभी उनका एक शिकार सत्तू (स्निग्धादीप चटर्जी) बनता है, और उसकी बहन (श्रेया धनवंतरी) भी संपर्क में आ जाती है। कहानी में राकेश सिंह का शालीन और सभ्य परिवार है, तो दूसरी तरफ चीटिंग में उसका साथ देनेवाली चीटर टीम भी।

काबिल स्टूडेंट्स के बल पर अधिक धन कमाने की चाह नें इस स्कैम को और बड़ा करने पर आमादा कर देती है। अब उसके साथ और बड़े लोग भी जुड़ गए हैं, लेकिन फिर तभी उनका एक गेम गलत हो जानें पर वह पुलिस की पकड़ में आ जाता है, अब उसके बाद क्या होता है? यह तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।

एक्टिंग

अभिनेता के रूप में इमरान हाशमी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। राकेश उर्फ रॉकी के रूप में इस चीटिंग के धंधे का सर्वेसर्वा होने के उसके अपने निर्णय हैं,  इमरान की एक्टिंग में काफी गंभीरता देखने को मिली है। इमरान ने इस फिल्म में राकेश के किरदार में अभिनय किया है, वह तारीफ के काबिल है। नए चेहरों में श्रेया और स्निग्धादीप ने फ्रेश और सहजता से अपना किरदार निभाया है|

फिल्म का निर्देशन

निर्देशक सौमिक सेन ने फिल्म के विषय एजुकेशन सिस्टम को चीटिंग माफिया से होने वाले नुकसान को दर्शकों के सामने एक बेहतर तरीके से रखा है। फिल्म अच्छी है, फिल्म में शानदार डॉयलॉग्स है, जो दर्शकों को पसंद आएंगे, फिल्म में कुल आठ गाने हैं जिन्हें गुरु रंधावा, सौमिक सेन, अरमान मलिक और तुलसी कुमार ने आवाज दी है। कुल मिलाकर यह एक अच्छी फिल्म है, जो एजुकेशन सिस्टम में चीटिंग माफिया की पोल खोलती है।

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