विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे कौन हैं ? जाने यहाँ सब कुछ इनके बारे में

गुरुवार 11 अप्रैल को विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे की ब्रिटेन में गिरफ्तारी हो गई है | 7 साल से ऑस्ट्रेलिया के जूलियन असांजे ने लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में अपने रहने का ठिकाना बनाये हुए था | आप भी जान लीजिये कि विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असान्जे कौन है | 

असांजे का जन्म 3 जुलाई, 1971 में ऑस्ट्रेलिया के टाउन विले में हुआ था। उन्होंने अपने बचपन और जवानी के दिनों में पूरे 37 स्कूल अटेंड किए हैं। वह 1990 में एक कंप्यूटर प्रोग्रामर और सॉफ्टवेयर डिवेलपर बन गए थे और वह हैकिंग में भी काफी माहिर रहा है। असांजे ने यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न से फिजिक्स और मैथ्स में डिग्री में अच्छे नम्बरों के साथ डिग्री प्राप्त की थी |

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जूलियन असांजे कुछ खास बातें-

वह बिना ट्रेस हुए इंटरनेट पर एक मुखबिर के तौर पर संवेदनशील दस्तावेज पोस्ट करने के लिए साल 2006 में wikileaks.org की शुरुआत की । असांजे पर 4 साल बाद स्वीडन की दो महिलाओं ने रेप और यौन शोषण करने के आरोप लगा दिए जिसके कारण स्वीडन ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया। असांजे ने इन आरोपों को पूरी तरह से झूठा बताया था |

विकिलीक्स ने 2010 में बड़ी संख्या में सेना से जुड़े अमेरिकी गोपनीय दस्तावेजों को पब्लिश करने का काम किया । इसके साथ ही असांजे ने अफगानिस्तान और इराक युद्ध से जुड़े दस्तावेजों को भी सार्वजनिक किया । इसके बाद असांजे को अमेरिका से बाहर कर दिया गया था |

2012 में ब्रिटेन द्वारा स्वीडन को प्रत्यपर्ति किए जाने से बचने के लिए, उन्होंने इक्वाडोर के दूतावास से उनकी शरण जाने के लिए गुहार लगाई जिसके बाद से वो लंदन में शरणार्थी बनकर रहने लगा था | 

इसके बाद वर्ष 2016 में जब डेमोक्रेट हिलरी क्लिंटन की टीम द्वारा अमेरिकी चुनाव अभियान में 20,000 हैक भेजे गये थे जिन्हें विकिलीक्स ने हैक किए ईमेल सार्वजनिक कर दिए। फिर एक साल बाद 2017 में स्वीडन ने उनके खिलाफ रेप से जुड़े मामले को को हटा दिया था। इसके बावजूद भी असांजे ने इक्वाडोर की नागरिकता अपने हाथ में ले ली। 

2018 में उनके वकील ने दूतावास में उनके रहने की परिस्थितियों को गलत ठहराया दिया इसके बाद 2019 में इक्वाडोर के राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो ने कहा कि असांजे ने अपने शरणस्थल के नियमों का उल्लंघन किया है। अब ब्रिटेन की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और उनकी शरण के खत्म होने का हवाला दिया है। 

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