स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती आज, जानें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और उनके विचार

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आज 23 जुलाई को स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती मनाई जाती है| आज 23 जुलाई 1856 को बाल गंगाधर तिलक का जन्म रत्नागिरी में हुआ था। जब बाल गंगाधर सोलह साल के ही थे, तभी उन्होंने अपनी मैट्रिक की परीक्षा पास की थी और उसके तुरंत बाद उनकी शादी भी हो गई, शादी के दौरान ही गंगाधर के पिता की भी मृत्यु हो गई थी|   

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तिलक ने विदेशी शासन के खिलाफ जनता को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें विदेशी शासन के खिलाफ भड़काया। लाला लाजपत राय की तरह, बाल गंगाधर तिलक का भी मानना था, कि ब्रिटिश शासन से छुटकारा पाने के लिए उग्रवादी तरीके आवश्यक थे। तिलक का सिद्धांत सैन्यवाद था। बाल गंगाधर तिलक का, “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मै इसे हासिल करके रहूंगा” का नारा प्रसिद्ध है। गंगाधर अपनी साम्राज्यवाद-विरोधी गतिविधियों की वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था| 

गगांधार जी के पिता एक स्कूल शिक्षक थे, उन्होंने 1879 में कानून की डिग्री हासिल की। वह आधुनिक भारत के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे। वर्ष 1881 में तिलक ने दो पत्रिकाओं , ‘केसरी’ मराठी में और ‘मराठा’ अंग्रेजी में इनकी शुरुआत की थी| 1885 में, उन्होंने डेक्कन एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की। इसके बाद उन्हें 1905 में गिरफ्तार कर छह साल के लिए मंडलीय जेल भेज दिया गया था। उन्होंने होम रूल आंदोलन शुरू किया। अभी भी तिलक को भारतीय राष्ट्रवाद के पिता के रूप में जाना जाता है। इसके बाद तिलक का निधन 1 अगस्त, 1920 को  हो गया था| बता दें कि इसी तरह तिलक की विचारधाराएं पूरे देश में प्रसिध्द हैं|

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