भौम प्रदोष पर किन-किन भगवानों की होती है पूजा, इसका महत्व और पूजा विधि

जानकारी देते हुए बता दें कि यदि प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है तो इस दिन त्रयोदशी तिथि होने से इसको भौम प्रदोष कहा जाता है और इस बार 2 अप्रैल को पड़ने वाला व्रत बहुत ही अच्छा है क्योंकि इस बार प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन ही पड़ रहा है | बात दें कि मंलवार के दिन शिव जी और हनुमान जी दोनों की पूजा होती है | इस दिन शिव जी की पूजा करने से हर दोष खत्म हो जाता है और हनुमान जी की पूजा करने से शत्रु बाधा शांत जो जाती है |

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प्रदोष व्रत में व्रत करने वाले लोगों को प्रसाद, फूलमाला, फल, विल्वपत्र आदि शिव जी को समर्पित करके पूजा करनी चाहिए यदि हो सके तो इस व्रत में पति-पत्नी एक साथ बैठकर शिव जी अराधना करें | ईशान कोण बनाकर कुश के आसन पर बैठकर ॐ नम: शिवाय का जाप करें | इसके अलावा पूजन के उपरांत शुद्ध सात्विक आहार का सेवन भी करना चाहिए |

जो व्यक्ति प्रदोष व्रत करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से मंगल दोष की समस्या से मुक्ति मिल जाती है शिव जी के साथ-साथ इस दिन शाम को हनुमान जी के सामने भी चमेली के तेल का दीपक जलाना चाहिए। भौम प्रदोष के दिन हनुमान जी की पूजा करने के लिए लाल वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान जी की पूजा करें | उनकी पूजा में लाल फूलों की माला चढ़ाने के साथ दीपक भी जलाना चाहिए और गुड़ का भोग लगाना चाहिए |

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