गणेशजी को ही दूर्वा क्यों और कैसे चढ़ाया जाता हैं – जानिए पूरी बात यहाँ विस्तार से

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इस साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गुरूवार 20 जून को मनाई गई है । इस तिथि को गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है| इस तिथि को ही गणेश जी की विशेष पूजा होती है। बताया जाता है, कि गणेशजी  दूर्वा काफी पसंद था, इसलिए उनकी पूजा करने के समय गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना जरूरी रहता हैं| इसके साथ ही दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 खास मंत्रों का जाप भी किया जाता है। उज्जैन के भागवत कथाकार पं. मनीष शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया है कि, भगवान गणेश को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं, इस संबंध में एक कथा प्रचलित है।

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दूर्वा से संबंधित कथा

कथा में बताया गया है कि, पुराने समय में अनलासुर नाम का एक राक्षस था और यह राक्षस काफी आतंक फैला रहा था| जिससे सभी देवी – देवता काफी परेशान हो चुके थे और वो राक्षस के आतंक को खत्म करना चाहते थे, लेकिन खत्म नहीं कर पा रहे थे, उस समय गणेशजी ने अनलासुर को निगल लिया था। जिससे गणेशजी के पेट में बहुत जलन होने लगी थी। इसके बाद ऋषियों ने गणेश जी खाने के लिए दूर्वा दी। दूर्वा खाते ही गणेशजी के पेट की जलन शांत हो गई। इसी के बाद से ही गणेशजी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू कर दी गई।

इस तरह चढ़ाते हैं दूर्वा

 गणेशजी को दूर्वा चढ़ाते समय दूर्वा का जोड़ा बनाकर चढ़ाना चाहिए| 22 दूर्वा को एक साथ जोड़ने पर दूर्वा के 11 जोड़े तैयार हो जाते हैं। इन 11 जोड़ों को गणेशजी को चढ़ाया जाता है,  और पूजा के लिए दूर्वा वहीं से लेनी चाहिए जहाँ का स्थान साफ-सुथरा हो| गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से पहले साफ पानी से अच्छी से तरह धो लेना चाहिए। इसके अलावा दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए।

ये मंत्र हैं

ऊँ गं गणपतेय नम:, ऊँ गणाधिपाय नमः, ऊँ उमापुत्राय नमः, ऊँ विघ्ननाशनाय नमः, ऊँ विनायकाय नमः, ऊँ ईशपुत्राय नमः, ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः, ऊँएकदन्ताय नमः, ऊँ इभवक्त्राय नमः, ऊँ मूषकवाहनाय नमः, ऊँ कुमारगुरवे नमः|

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