सोनचिड़िया मूवी रिव्यू – बहुत दमदार है पिक्चर आप भी पढ ले

0
199

अब सिनेमा घरों में मूवी सोनचिड़िया आने के बहुत कम दिन बचे हैं अब इस मूवी में दिलचस्पी रखने वाले दर्शकों का इंतजार हुआ खत्म, अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म 1 मार्च को ही रिलीज होने जा रही है|

Advertisement

बता दें कि इसके पहले 7 जनवरी को इस मूवी का लगभग तीन मिनट का ट्रेलर रिलीज किया गया था | सोनचिड़िया मूवी ट्रेलर की शुरुवात 1975 में लगी इमरजेंसी के अनाउंसमेंट पर की गई है इसी से चम्बल क्षेत्र में फंसे डाकुओं के बीच काफी हडकंप मच जाता है | इस मूवी का ट्रेलर पूरे उत्तर प्रदेश के लोगों को काफी पसंद आया है | इस फ़िल्म में सुशांत सिंह ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है |

सुशांत सिंह का डाकू का किरदार

अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऐसे लोगों को पर्दे पर लाया गया है जो अपने किरदारों को निभाने में पूरी तरह से निपुण हैं | बता दें कि इस फ़िल्म में लोगों को यूपी के सुशांत सिंह का डकैत का किरदार बहुत अधिक पसंद आ रहा है इस किरदार को निभाने के लिए सुशांत सिंह ने काफी मेहनत की है | इसके अलावा इस फ़िल्म में भूमि भी डकैत का रोल निभाती हुई पहली बार पर्दे पर दिखेंगी | वहीं जब लोगों ने इस फ़िल्म के ट्रेलर में मनोज का देसी अंदाज देखा तो उन्हें यह अंदाज बहुत अलग और बेहद पसंद आया | इसके अलावा इस फ़िल्म में आपको रणवीर शौरी और आशुतोष राणा भी शानदार भूमिका के साथ पर्दे पर दिखेंगे

फ़िल्म की कहानी

इस फ़िल्म की कहानी चम्बल के डकैत मान सिंह और उसके पूरे गैंग की कहानी पर आधारित है | इस फ़िल्म की ज्यादातर शूटिंग चम्बल क्षेत्र में ही की गई है इस फ़िल्म में लोगों को क्राइम के साथ – साथ ड्रामा भी देखने को मिलेगा जो लोगों को काफी हद तक पसन्द आयेगा | इस फ़िल्म में अभिषेक ने इस बात पर अधिक जोर देने का प्रयास किया है कि क्या वास्तव में सत्य है और आखिर सत्य है तो गलत क्या है? वहीं मान सिंह (मनोज बाजपेई) और उसके आदमी, वकील (रणवीर शौरी) और लखना (सुशांत सिंह) भगवान पर भरोसा रखने वाले डाकू होते हैं। वे अपने जीने की वजह ढूंढते रहते हैं और अपने वजूद पर सवाल खड़े करते हैं। 

डकैत, पुलिस, लड़ाई, हमला आदि चीजों से भरी होने के बावजूद भी फिल्म अपराध पर अच्छी नहीं है बल्कि अपराध को अंजाम तक पहुँचाने वाले अपराधियों के हालात की कहानी है। इस फ़िल्म में देखना यह है कि क्या ये लोग अपने अंदर के विलेन को अपने अन्दर रख पाते हैं या फिर यह विलेन उनपर हावी हो जाता है?

खास तौर पर इस फिल्म में प्रकृति के नियम को दर्शाया गया है। फिल्म जाति प्रथा, पितृसत्ता, लिंग भेद और अंध- विश्वास पर आधारित है | इस फिल्म में बदला लेने और न्याय में अंतर के बारे में समझाया गया है |  

Advertisement