कुलभूषण जाधव मामले में वर्ल्ड कोर्ट के सामने क्‍या रखा भारत और पाकिस्‍तान ने अपना पक्ष

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भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय बने रहे कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) ने अंतिम फैसला सुना दिया। आईसीजे का फैसला भारत के पक्ष में आया है। आईसीजे नें अपने फैसले में कहा कि कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगेगी और कूलभूषण जाधव के केस पर फिर से नए सिरे से विचार होगा, इसके साथ ही ICJ ने ये भी फैसला सुनाया है, कि कुलभूषण जाधव को काउंसिलर एक्सेस की इजाजत मिलेगी|

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पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत ने कुलभूषण जाधव को आतंकवाद, जासूसी के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई थी । इस मामले में पहली बार भारत ने 8 मई 2017 को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, और 18 मई 2017 को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट ने कुलभूषण जाधव की सजा के स्‍थगन का आदेश दिया था। इस आदेश में यहां तक कहा गया था, कि जब तक आईसीजे इस संबंध में अपना फैसला न सुना दे तब तक पाकिस्‍तान सैन्‍य अदालत द्वारा दी गई सजा को स्‍थगित किया जाए। लगभग तीन वर्ष तक चले इस प्रकरण में आईये जानते हैं, कि दोनों देशों ने अपने पक्ष में क्‍या कहा ?

भारत का पक्ष

1.पाकिस्‍तान ने इस मामले में वियना संधि का उल्‍लंघन किया है। पाकिस्‍तान को जाधव की गिरफ्तारी से पहले और गिरफ्तारी के तुरंत बाद भारत के काउंसलर अधिकारी को इसकी जानकारी तुरंत दी जानी चाहिए थी।

2.भारतीय अधिकारी को जाधव से कभी भी मुलाकात की छूट और इजाजत दी जानी चाहिए थी, जो की नहीं दी गई। इसी तरह जाधव को भी इस बात की छूट होनी चाहिए थी कि वह कभी भी अपना पक्ष भारतीय अधिकारियों के समक्ष रख सके।

3.पाकिस्‍तान जाधव को काउंसलर एक्‍सेस देने के लिए बाध्‍य है, लेकिन उसने इसका उल्‍लंघन किया। जाधव को 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया गया और इसकी जानकारी भारत को 25 मार्च 2016 को दी। वियना संधि के मुताबिक जाधव की गिरफ्तारी की सूचना तुरंत भारतीय हाई कमिश्‍नर को दी जानी चाहिए थी।

4.एक विदेशी नागरिक पर सैन्‍य अदालत में मामले का चलाया जाना अपने आप में International Covenant on Civil and Political Rights (ICCPR) का खुला उल्‍लंघन है। ऐसा करके न सिर्फ ICCPR का उल्‍लंघन किया है, बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय नियमों का भी मजाक उड़ाया है।

5.भारत ने कोर्ट में पाकिस्‍तान द्वारा कुलभूषण पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कोर्ट के समक्ष पाकिस्‍तान की तरफ से एक भी पुख्‍ता सुबूत पेश नहीं किया गया।

6.पाकिस्‍तान की तरफ से भारत को ये भी नहीं बताया गया कि क्‍या गिरफ्तारी के बाद जाधव ने किसी भी तरह की कोई अपील कोर्ट में की थी या नहीं। यदि की थी तो उसमें क्‍या बातें कही गई थीं और क्‍या उन्‍हें कानूनी मदद मुहैया करवाई गई थी। जब मीडिया के जरिए जाधव का मामला सामने आया तो पता चला कि उनकी अपील को सैन्‍य अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद जाधव की तरफ से दया याचिका दायर की गई थी।

7.जाधव की मां ने एक अपील दायर की थी और इस मामले का पूरा ब्‍यौरा मांगा था, लेकिन पाकिस्‍तान की तरफ से वह भी मुहैया नहीं करवाया गया। इतना ही नहीं जाधव की मां ने इसके लिए अपने और अपने पति के लिए वीजा देने की मांग की थी। 25 अप्रैल 2017 को वीजा संबंधी अपील की गई थी, जिस पर छह माह बाद भी कोई फैसला नहीं लिया गया।

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पाकिस्तान का पक्ष

1.यह मामला पाकिस्‍तान की जासूसी और सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए इसमें आरोपी को काउंसलर एक्‍सेस की सुविधा देने का कोई मतलब नहीं होता है।

2.यह मामला पूरी तरह से पाकिस्‍तान की सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे से जुड़ा है, इसलिए इसमें अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का कोई दखल नहीं बनता है। जाधव देश में हुई आतंकी गतिविधियों, देश के संवेदनशील ठिकानों की जासूसी में लिप्‍त रहा है।

3.कुलभूषण जाधव को पाकिस्‍तान की सुरक्षा एजेंसियों ने बलूचिस्‍तान से गिरफ्तार किया था। उसके पास से फर्जी पासपोर्ट भी बरामद हुआ था। जिनमें से एक हुसैन मुबारक पटेल के नाम से था, जाधव ने स्वयं अपने ऊपर लगे आरोपों पर कुबूलनामा दिया है।

4.कुलभूषण जाधव एक रॉ एजेंट है, जो पाकिस्‍तान में जासूसी और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के मकसद से घुसा था। पाकिस्‍तान की अदालत में जाधव को अपना पक्ष रखने की छूट दी गई थी। इसके बाद ही सैन्‍य कोर्ट ने उस पर अंतिम फैसला सुनाया था।

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