Sunday, April 18, 2021
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गणेश मूर्ति विसर्जन का बाल गंगाधर तिलक से है खास कनेक्शन, यहाँ से जानें पूरी बात

गणेश चतुर्थी के बाद हर जगह गणेशोत्सव की धूम मची रही है,  यह धूम लगभग दस दिनों तक मची रहती हैं| वहीं अब नदियों में गणेश मूर्ति के विसर्जन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई, लेकिन क्या आपको मालूम है कि, गणेश मूर्ति विसर्जन का बाल गंगाधर तिलक से क्या ख़ास कनेक्शन है ? यो जानिये यहाँ से पूरी बात| 

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Bal Gangadhar Tilak

बताया गया है कि, आज से लॉगभग 100 से पहले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने ही गणेशोत्सव की नींव रखी थी| इस त्योहार को मनाने के पीछे का उद्देशय अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था| वर्तमान समय में जिस गणेशोत्सव को लोग इतनी धूम-धाम से मनाते हैं, उस पर्व को शुरू करने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था|

विसर्जन की शुरुआत

1890 के दशक में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तिलक अक्सर चौपाटी पर समुद्र के किनारे बैठते थे और वे इसी सोच में डूबे रहते थे, कि आखिर लोगों को जोड़ा कैसे जाए ? अंग्रेजों के खिलाफ एकजुटता बनाने के लिए उन्होंने धार्मिक सभी पहले मार्ग अपनाया| तिलक ने सोचा कि, क्यों न गणेशोत्सव को घरों से निकालकर सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए, ताकि इसमें हर जाति के लोग शिरकत कर सकें|

गणेश मूर्ति विसर्जन की पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी, जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था| 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली, तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है, तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था,  इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है| 

इसी कथा में यह भी वर्णित है, कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया| यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई और मिट्टी गिरनें लगी, तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा गया| इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है|

 दूसरी मान्यता के अनुसार  

मान्‍यता है कि, गणपति उत्‍सव के दौरान लोग अपनी जिस इच्‍छा की पूर्ति करना चाहते हैं, वे भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं| गणेश स्‍थापना के बाद से 10 दिनों तक भगवान गणपति लोगों की इच्‍छाएं सुन-सुनकर इतना गर्म हो जाते हैं, कि चतुर्दशी को बहते जल में विसर्जित कर उन्‍हें शीतल किया जाता है|’

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