कायम की मिसाल: चौकीदार पिता का बेटा बोर्ड परीक्षा में लाया 500 में से 499 नंबर

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सोने की परख तपती आग में ही होती है और हीरा कोयले की खान में ही पाया जाता है, यह दोनों बातें मध्यप्रदेश के टॉपर आयुष्मान ताम्रकार पर लागू होती है | आयुष्मान सागर जिले में मोहननगर वार्ड की तंग गली के एक आधे कच्चे-पक्के मकान में रहते है | यहीं पर सुविधा के आभाव में अपनी पढ़ाई करके हाईस्कूल की परीक्षा में 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं | इन्होंने गगन त्रिपाठी के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया है |

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आयुष्मान ताम्रकार के पिता विमल ताम्रकार एक शादीघर में चौकीदारी का काम करते है, इनकी माता बरखा आस-पास पड़ोस में मजदूरी का काम करके घर में सहयोग करती है, आयुष्मान अपने खर्च के लिए दूसरों की दुकान पर काम करते है | माता- पिता की आय से घर खर्च चलाना मुश्किल है |

कल जब मध्यप्रदेश के 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित किये गए उस समय आयुष्मान के पिता अपनी नौकरी पर थे | वही पर उन्हें अपने बेटे के पास होने की जानकारी हुई, जिससे उनकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा है | इस खुशी में बेटी आयुशी ने भी चार चाँद लगा दिए उसने दसवीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए है |

आयुष्मान के घर लोगों का आना- जाना लगा हुआ है | जब आयुष्मान की माँ से इस बारे में बात की गयी तो उन्होंने बताया कि ‘आगे की पढ़ाई कैसे होगी, क्योंकि पैसे नहीं हैं। अभी तो घर खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता है। आयुष्मान दूसरों की दुकान पर बैठकर अपना खर्च निकालता था। बेटा बड़ा इंजीनियर बने यही इच्छा है।’ अब देखना होगा की राज्य सरकार ऐसी प्रतिभा को कैसे कदम उठाकर सहयोग करती है |

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