नाग पंचमी के दिन बन रहा है दुर्लभ योग, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

भगवन शिव का प्रिय महीना सावन 17 जुलाई से शुरू हो चुका है। इस महीने को बहुत ही पवित्र महीना माना गया है। सावन के महीने में सोमवार का दिन बेहद अहम माना जाता है, और में नाग पंचमी का त्‍यौहार भी इसी महीने में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्‍ति मिलती है, और नाग देवता की पूजा करने से महादेव जल्‍द प्रसन्‍न होते हैं। नाग को शिव जी के आभूषणों में से एक माना जाता है। 

ये भी पढ़े: पूजा-पाठ / अगर भगवान को फूल चढ़ाए हो और वो मुरझा जाए तब क्या करना चाहिए

इस बार नाग पंचमी पर पूरे 125 सालों बाद सोमवार के दिन को पड़ रही है। जिसके कारण इस पर्व का फल दोगुना हो जाएगा। संयोग के साथ-साथ इस दिन यायीजयद योग के साथ हस्त नक्षत्र है। नाग पंचमी का त्योहार नागों को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष यह त्‍यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 5 अगस्त दिन सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। नाग पंचमी का पर्व नागों के साथ जीवों के प्रति सम्मान, उनके संवर्धन एवं संरक्षण की प्रेरणा देता है।

नाग पंचमी शुभ मुहूर्त

1.पंचमी तिथि 4 अगस्त को शाम 6.49 बजे शुरू होगी

2. पांच अगस्त के दिन नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त सुबह 5:49 से 8:28 के बीच पड़ रहा है, जबकि समाप्ति तिथि इसी दिन दोपहर 3:54 तक रहेगी।

पूजा विधि एवं मंत्र

नाग पंचमी के दिन अपने घर के द्वार के दोनों ओर गोबर के सर्प बनाकर उनका दही, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, मोदक और मालपुआ आदि अर्पित कर पूजा करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराकर एक भुक्त व्रत करने से घर में सर्पों का भय नहीं होता है। नागों को दूध से स्नान और पूजन कर दूध पिलाने से और वासुकीकुण्ड में स्नान करने से भी सर्प भय से मुक्ति मिलती है।

इस मंत्र से करे प्रार्थना  

अनन्तं वासकिं शेषं पद्मकम्बलमेव च।

तथा कर्कोटकं नागं नागमश्वतरं तथा।।

धृतराष्ट्रं शंखपालं कालाख्यं तक्षकं तथा।

पिंगलञ्च महानागं प्रणमामि मुहुर्मुरिति।।

ये भी पढ़े: Rath Yatra 2019: तो इस कारण से जगन्नाथ भगवान के आंखों पर बांधी जाती है पट्टी |