परंपरा / पूजा-पाठ में किस प्रकार की थाली, कटोरी और लोटे का उपयोग करना चाहिए यहाँ से आप भी जाने

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    पूजा-पाठ के दौरान हम कई प्रकार के बर्तनों का उपयोग करते है, खासतौर पर लोटा, पूजा की थाली, कटोरी, दीपक आदि सभी देवी-देवताओं की पूजा में रखे जाते हैं। ये बर्तन सोना, चांदी, पीतल, या तांबे से निर्मित होते हैं, परन्तु ताम्बे के बर्तन पूजा के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं। ऐसी मान्यता है, कि पूजा में इन बर्तनों का उपयोग करने पर पूजा जल्दी सफल हो जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए पूजा-पाठ में उपयोग किए जाने वाले बर्तनों से जुड़ी खास बातें…

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    पूजा में यह धातुएं होती हैं- शुभ

    ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार पूजा के लिए सोना, चांदी, पीतल, तांबे से बने बर्तन श्रेष्ठ माने गए हैं। पूजा में इन बर्तनों का उपयोग करने से यह बर्तन बार-बार हमारी त्वचा के संपर्क में आते हैं, और इन धातुओं को रगड़ना हमारी त्वचा के लिए लाभकारी होता है। इन धातुओं के लगातार संपर्क में रहने से हमें अनेक प्रकार की बीमारियों में राहत मिल सकती है| जैसे कि,  स्वर्ण भस्म, रजत भस्म का उपयोग अनेक प्रकार की दवाओं में किया जाता है,इन भस्म से जो लाभ प्राप्त होता है, वही लाभ इन धातुओं के संपर्क में रहने से प्राप्त होता है।

    पूजा में यह धातुएं होती हैं- अशुभ

    धार्मिक कर्मों के लिए पूजा में लोहा, स्टील और एल्युमिनियम से बने बर्तनों का उपयोग नहीं कर चाहिए, क्योंकि यह धातुएं अपवित्र मानी गई हैं, इसीलिए इन धातुओं से निर्मित मूर्तियां पूजा में उपयोग नहीं की जाती है । लोहे में हवा, पानी से जंग लग जाती है, और एल्युमिनियम से भी कालिख निकलती है। पूजा के उपरांत इन मूर्तियों को कई बार हाथों से स्नान कराया जाता है, उस समय इन मूर्तियों रगड़ा भी जाता है। ऐसे में लोहे और एल्युमिनियम से निकलने वाली जंग और कालिख का हमारी त्वचा पर हानिकारक प्रभाव डालती है, जिसके कारण लोहा, एल्युमीनियम को पूजा में वर्जित किया गया है।

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