सहारनपुर लोकसभा सीट जातीय समीकरण क्या कहता है, किस पार्टी के लिए है फायदेमंद

सहारनपुर लोकसभा सीट वर्तमान समय में सबसे बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बनता जा रहा है| सभी दल अपनी जीत की दावेदारी पेश कर रहे है| बीएसपी, एसपी और आरएलडी  के गठबंधन से यहाँ पर राजनीतिक समीकरण बदल गए है| यहाँ पर गठबंधन यह दर्शा रहा है, कि वह मुस्लिमों का सच्चा हितैषी है, इसलिए गठबंधन ही मुस्लिम वोटों का इकलौता दावेदार है|

सहारनपुर में कुल हिंदू 56.74 फीसदी तथा मुस्लिम जनसंख्या 41.95 फीसदी है| गठबंधन अपना सारा फोकस 41.95 फीसदी मुस्लिम वोटो पर लगाये हुए है| हिन्दू वोटो में एससी वोट को बहुजन समाज पार्टी का मुख्य वोट बैंक माना जाता है|

यह भी पढ़े: सहारनपुर लोकसभा सीट पर फिर खिलेगा कमल या कांग्रेस दिखाएगी दम या SP-BSP मारेगी बाजी – क्या है चुनावी समीकरण

मुस्लिम वोटो में तीन तलाक का मुद्दा हावी रहेगा, अब यहाँ पर देखना यह होगा कि तीन तलाक से बीजेपी का लाभ होता है या हानि| बीजेपी से उम्मीदवार राघव लखनपाल है, जो कि मौजूदा सांसद भी है| बीजेपी तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को अपने पक्ष में करना चाहती है, इसके साथ ही हिन्दू वोट बैंक को साधने में जुटी हुई है|

उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट में जातीय समीकरण काफी मायने रखता है| यहाँ पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा| सपा-बसपा गठबंधन की तरफ से बसपा प्रत्याशी इस सीट से मैदान में है, जबकि कांग्रेस ने पिछली बार के रनर अप इमरान मसूद को मैदान में उतारा है|

लोकसभा सीट SP+BSP+RLD BJP+ कांग्रेस
सहारनपुर हाजी फजलुर्रहमान (बीएसपी) राघव लखनपाल इमरान मसूद

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए महागठबंधन के समर्थन की बात कह रहे हैं लेकिन उनके जेल से रिहा होने के बाद सहारनपुर में एक बड़े मुस्लिम नेता का टिकट पक्‍का होता दिख रहा है| चंद्रशेखर उर्फ रावण के जेल से निकलने से बसपा प्रत्याशी को तगड़ा झटका लग सकता है|

चंद्रशेखर ने इमरान मसूद को भरी सभा में गले लगाया था और कहा था, कि इमरान मसूद कहीं भी रहे, किसी भी पार्टी में रहें, चंद्रशेखर उनके साथ हैं। माना जा रहा है, कि इमरान मसूद को इसका सीधा लाभ 2019 चुनाव में मिलेगा। दलित मुस्लिम का यह गठजोड़ इमरान मसूद की दावेदारी पक्‍की कर रहा है| चंद्रशेखर उर्फ रावण की सहारनपुर में दलित वोटों पर अच्छी पकड़ है, जिसका फायदा कांग्रेस को मिलनें की पूरी संभावना है|

ये भी पढ़े: सहारनपुर लोकसभा सीट का अब तक का क्या रहा है इतिहास, कौन कब किस पर रहा है भारी