शिव के नामों का रहस्य शायद आपको नहीं होगा मालूम – पढ़े यहाँ से

हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूज्यनीय भगवान शिव है| पुराणों में भगवान शिव के अट्ठारह नामों का उल्लेख किया गया है| इनमे से शिव,पशुपति,शिव, शम्भु, नीलकंठ, महेश्वर, नटराज आदि प्रमुख हैं| शिव शंकर अपने भक्तों के पापों को नष्ट करते है, शिवशंकर भगवान का दूसरा नाम पशुपति है|

शिव जी हम सबकों ज्ञान देते है, इसलिए इन्हें पशुपति भी कहा जाता है| भगवान शिव को मृत्युंजय के नाम से भी जाना जाता है| भगवान शिव अजर-अमर हैं, इसलिए इन्हें मृत्युंजय  कहा जाता है|

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शिवजी को पंचवक्त्र भी कहा जाता है, इसके लिए बताया जाता है, कि एक बार भगवान विष्णु ने कई रूपों को धारण किया जिसके सभी लोगों ने दर्शन किये| इसके बाद शिव भगवान ने भी पांच मुख धारण किये, प्रत्येक मुख पर तीन- तीन नेत्र थे, इसलिए इन्हें पंचवक्त्र कहा गया है|

शिव जी को कृत्तिवासा भी कहा गया है, इसके लिए कहा जाता है, जो गज चर्म धारण करे उसे कृत्तिवासा कहा जाता है, महिषासुर का एक पुत्र गजासुर था उसी के कहने पर भगवान शिव ने चर्म धारण किया था, इसलिए इन्हें कृत्तिवासा कहा जाता है|

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शिव जी का कंठ नीला होने के कारण इन्हें शितिकंठ कहा जाता है | भगवान शिव को खंडपरशु भी कहा जाता है इसके लिए बताया जाता है कि जिस समय दक्ष यज्ञ का ध्वंस करने के लिए भगवान शिव ने त्रिशूल को छोड़ा था उस समय त्रिशूल ने बदरिकाश्रम में तपलीन नारायण जी को बेध दिया था इसके बाद नर ने एक तिनके को शिवजी पर प्रहार के रूप में प्रयोग किया, जिसके टुकड़े-टुकड़े शिवजी ने कर दिए थे |

इसके अतिरिक्त शिवजी को प्रमथाधिव, गंगाधर, महेश्वर, रुद्र, विष्णु, पितामह, संसार वैद्य, सर्वज्ञ, परमात्मा और कपाली के नामों से भी जाना जाता है | सम्पूर्ण भारत में भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंग हैं, जिनमें से प्रमुख सोमनाथ, महाकाल या महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और अमलेश्वर, केदारनाथ, भीमशंकर, विश्वनाथ, त्र्यम्बेकश्वर, वैद्यनाथ धाम, नागेश, रामेश्वरम और घुश्मेश्वर इत्यादि हैं |

पुराणों के अनुसार ब्रम्हा और विष्णु जी को शिव जी ने ही उत्पन्न किया है| ब्रम्हा और विष्णु जी उत्पन्न होने के बाद शिव जी की पूजा की तभी से शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है |

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