कौशांबी लोकसभा सीट का इतिहास क्या है, इस चुनावी माहौल के अनुसार कौन जीतेगा

कौशांबी भगवान गौतम बुद्ध की नगरी के नाम से जानी जाती है | कौशांबी लोकसभा सीट अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है | प्रत्येक चुनाव में इनकी भूमिका अहम् होती है | वर्ष 2008 से पूर्व इस सीट को चायल लोकसभा के नाम से जाना जाता था | इस लोकसभा पर पहला चुनाव 1951 में हुआ था इस पर कांग्रेस प्रत्याशी मसुरिया दीन को जीत मिली थी | यह जनता के बीच अपने व्यवहार कुशलता के लिए जाने जाते थे इसलिए वह इस सीट पर लगातार चार बार जीतने में सफल रहे |

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इसी प्रकार इस सीट पर शैलेंद्र कुमार के सहारे सपा ने जीत दर्ज की | शैलेंद्र कुमार तीन बार चायल संसदीय क्षेत्र से सांसद चुन कर संसद गए | भाजपा के पास यह सीट दो बार गयी पहली बार डा. अमृतलाल भारतीय व दूसरी बार विनोद सोनकर ने जीत दर्ज की |

कौशाम्बी लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है | इस सीट का गठन 2008 में किया गया था | प्रतापगढ़ जिले की दो विधानसभाओं और कौशाम्बी जिले को मिलाकर इस सीट का क्षेत्र निर्धारित किया गया | वर्तमान समय में बीजेपी के विनोद कुमार सोनकर यहाँ के सांसद हैं | रघुराज प्रताप सिंह (उर्फ राजा भैया) का इस संसदीय सीट पर बहुत ही हस्तक्षेप है |

कौशाम्बी लोकसभा के गठन के बाद इस सीट पर अभी तक दो बार चुनाव हुए हैं | जिसमे कि एक बार सपा और एक बार बीजेपी को जीत मिली |

कौशांबी की जनसंख्या 15 लाख 99 हजार 596 है, जिनमें पुरुषों की संख्या 8 लाख 38 हजार 485 और महिलाओं की संख्या 7 लाख 61 हजार 111 है |

नोट: कौशांबी लोकसभा सीट पर चुनाव 6 मई होंगे |

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