मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का क्या रहा अब तक का इतिहास

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर कई बार विवादों का केंन्द्र रहा है| मुजफ्फरनगर को उत्तर प्रदेश का ‘जाटलैंड’ कहा जाता है| 2013 में यहां हुए दंगों के कारण यह बहुत ही चर्चित हुआ था| सभी राजनैतिक दलों ने इसे अपने- अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की थी| दंगा होने के बाद सभी दल इस पर जीत दर्ज करने का प्रयास कर रहे है, जिससे जनता के बीच अच्छा सन्देश पहुचे|

इस सीट पर वर्ष 2014 में संजीव बालियान बड़ी जीत दर्ज की थी| संजीव बालियान केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके है| वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यहाँ पर जाटों की नाराजगी देखने को मिली थी, जिससे भाजपा के लिए यह सीट बहुत ही कठिन विषय बनी हुई है|

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मुजफ्फरनगर सीट का इतिहास (Muzaffarnagar Seat History)

मुजफ्फरनगर सीट 1952 के लोकसभा चुनाव से लेकर 1962 तक कांग्रेस के पास रही| इसके बाद लगातार दो बार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी| 1977 से 1991 के बीच यह सीट जनता दल और कांग्रेस के पास रही|

वर्ष 1990 पूरे देश में राम मंदिर का मुद्दा चरम पर था| इसका असर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर भी पड़ा यहाँ पर भाजपा ने तीन बार लगातार जीत दर्ज की, भारतीय जनता पार्टी 1991, 1996 और 1998 में इस सीट पर काबिज रही|

इसके बाद वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के पाले में चली गयी| 2004 में यह  समाजवादी पार्टी के पास रही इसके बाद यह सीट बहुजन समाज पार्टी के पास चली गयी| वर्ष 2014 में मोदी लहर में यह सीट पुनः भारतीय जनता पार्टी के पास आ गयी|

वोटरों का समीकरण (Equation Of Voters)

मुजफ्फरनगर में लगभग 16 लाख वोटर्स हैं, इसमें पुरुष वोटर 875186 और 713297 महिला वोटर हैं| लोकसभा चुनाव 2014 में इस सीट पर 69.7 फीसदी मतदान हुआ था, इसके साथ ही 4739 वोट NOTA पर पड़े थे| यहाँ पर 27 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या हैं|

मुजफ्फरनगर में पांच विधानसभा सीट बुढ़ाना, चरथावल, मुजफ्फरनगर, खतौली, सरधना है | वर्तमान समय में यह पांचों सीट भारतीय जनता पार्टी के पास है| सरधना सीट से ठाकुर संगीत सोम विधायक हैं, जो अक्सर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में बने रहते है|

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