पीलीभीत लोकसभा में कितने है मतदाता, किस पार्टी का इस सीट पर रहा है ज्यादा कब्जा

उत्तराखंड व नेपाल की सीमा से लगे इस संसदीय क्षेत्र में लोकसभा सीट को लेकर चर्चा काफी तेज है| पीलीभीत लोकसभा सीट पर पिछले लगभग तीन दशक से संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का राज रहा है| पीलीभीत सीट पर बीजेपी पहले नंबर पर, समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर, बसपा तीसरे नंबर पर तथा चौथे पर कांग्रेस रही है| इस बार पीलीभीत से सपा-बसपा-रालोद के उम्मीदवार हेमराज वर्मा को मैदान में उतारा गया है, वहीं बीजेपी ने कमल खिलाने की जिम्मेदारी वरुण गांधी को दी है|

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पीलीभीत लोकसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि

वर्ष 1951 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की थी, परन्तु  1957, 1962, 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी, हालांकि, 1971 में फिर कांग्रेस ने यहां वापसी की, परन्तु 1977 में चली सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस की बड़ी शिकस्त मिली | 1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से बड़ी जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां अभी तक जीत नहीं दर्ज करा पाई|

 संजय गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार से अलग हुई मेनका ने 1989 में जनता दल के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और सफलता प्राप्त की, परन्तु दो साल बाद हुए चुनाव में ही बीजेपी ने यहां से जीत हासिल की| इसके पश्चात वर्ष 1996 से 2004 तक मेनका गांधी ने लगातार चार बार यहां से चुनाव जीता, इनमें दो बार निर्दलीय और 2004 में बीजेपी के टिकट से चुनाव में जीत हासिल की थी. 2009 में मेनका गांधी ने अपने बेटे वरुण गांधी के लिए यह सीट छोड़ी और वरुण यहां से सांसद चुने गए, लेकिन 2014 में एक बार फिर वह यहां वापस आईं और छठीं बार यहां से सांसद चुनी गईं|

पीलीभीत लोकसभा में मतदाता

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में हिंदू मतदाताओ के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओ का खास प्रभाव है| पीलीभीत जिले में लगभग 30 फीसदी मुस्लिम नागरिक हैं, ऐसे में मुस्लिम वोटों को अनदेखा नहीं किया जा सकता| वर्ष 2014 के चुनाव के अनुसार इस सीट पर 16 लाख से अधिक वोटर हैं, जिनमें 9 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं| इस क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें बहेड़ी, पीलीभीत, बड़खेड़ा, पूरनपुर और बिसालपुर शामिल हैं| वर्ष  2017 के विधानसभा चुनाव में इन सभी पांच सीटों पर बीजेपी ने अपना परचम लहराया था|

पिछले लोकसभा चुनाव में यहां मेनका गांधी के प्रभाव और मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला था| मेनका गांधी को 51 फीसदी से भी अधिक मत प्राप्त किया था, और उन्होंने एकतरफा जीत हासिल की थी| वर्ष  2014 के चुनाव में मेनका गांधी को 52.1% और उनके विरोधी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 22.8% वोट हासिल हुए थे| 2014 में इस सीट पर कुल 62.9% मतदान हुआ था|

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