Karnataka: कर्नाटक की सियासत हलचल पर, बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा अपना फैसला

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Karnataka: कर्नाटक की सियासत हलचल पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार 16 जुलाई की गई सुनवाई में विधानसभा अध्‍यक्ष के आर रमेश कुमार ने कहा है कि, मैं बागी विधायकों की अयोग्‍यता और उनके इस्‍तीफों पर कल यानी बुधवार को फैसला लूंगा। इसी के साथ उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट को अपने पूर्व के आदेश में संशोधन की भी मांग कर दी है। वहीं अब  कल 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट बागी विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाएगा।  इसके अलावा बीजेपी ने सरकार गिरने की स्थिति में वह पांच दिन के भीतर नई सरकार का गठन करनें का दावा किया है|  

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की शुरुआत में वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता मुकुल रोहतगी ने बागी विधायकों का पक्ष लेते  हुए कहा है कि, इस्‍तीफा देने वाले विधायक विधानसभा में नहीं जाना चाहते हैं। स्‍पीकर की ओर से उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं करके जबर्दस्ती की जा रही है। इसी के साथ कहा कि, इस्‍तीफा देने वाले विधायकों पर दबाव नहीं डाला जा सकता है। यदि ये पद छोड़ रहे हैं, तो इनका इस्‍तीफा स्‍वीकार किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि, स्‍पीकर विधायकों के इस्‍तीफों को कई दिनों तक लटकाए रख सकते हैं। कानून कहता है, कि इस्‍तीफों पर जल्‍द फैसला लेना होगा। स्‍पीकर एक ही समय विधायकों के इस्‍तीफों और उन्‍हें अयोग्‍य ठहराने पर फैसला लेने की कोशिश कर रहे हैं।  

सरकार के पक्ष में मतदान करने का दबाव  

बागी विधायकों का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि, विधायकों को अयोग्‍य करार देने के लिए ही स्‍पीकर ने उनका इस्‍तीफा पेंडिंग रखा है। इस पर बेंच ने रोहतगी से पूछा कि, क्‍या विधायकों के इस्‍तीफों के बाद स्‍पीकर पर उन्‍हें अयोग्‍य करार देने का कोई सांविधानिक दायित्‍व था? इसके बाद रोहतगी ने कहा कि, नियमों के अनुसार स्‍पीकर को फैसला लेना होगा। वह इस्‍तीफों को पेंडिंग नहीं रख सकते हैं। इसके बाद बागी विधायकों की ओर से अदालत को बताया गया कि, राज्य सरकार अल्पमत में आ गई है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनके इस्तीफे नहीं स्‍वीकार करके फ्लोर टेस्‍ट के दौरान सरकार सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

अभिषेक मनु सिंघवी 

विधानसभा अध्‍यक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी  ने कहा कि, स्‍पीकर को समयबद्ध तरीके से मामले को तय करने के लिए नहीं कहा जा सकता है।’ उन्‍होंने सवाल उठाया कि, स्‍पीकर को विशेष तरीके से फैसला लेने का निर्देश कैसे दिया जा सकता है। विधायकों की ओर से अध्यक्ष को वैध इस्तीफा सौंपा जाना चाहिए जबकि विधायक विधानसभा अध्‍यक्ष के कार्यालय में अपने इस्तीफे सौंपने के पांच दिन बाद यानी 11 जुलाई को उनके सामने उपस्थित हुए।

कांग्रेस ने कहा 

विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने सोमवार 15 जुलाई को कहा, मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार सुबह ग्यारह बजे सदन में विश्वास मत प्रस्ताव रखेंगे। कल कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्तापक्ष व विपक्ष के नेताओं के साथ बातचीत में विश्वास मत के लिए गुरुवार का दिन तय हो गया। साथ ही, उन्होंने भाजपा की मांग पर विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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